Monday, February 22, 2010
Deewaren
हम अपने आसपास इतनी दीवारें क्यों खड़ी करतें है .... हालाँकि दीवारें खड़ी करना इतना आसन काम नहीं है..... फिर भी...... चलो खड़ी कर भी लीं तो उन्हें इतना मजबूत क्यों बनाते हैं.... मजबूत न भी हो तो भी उसे ऊपर से पैंट वैंट कर के इतना मजबूत दिखाते हैं कि सामने वाले को तोड़ने की हिम्मत ही न हो...... वैसे मैंने एक बात देखी है.... दीवार कितनी भी मजबूत क्यों न हो अगर एक ईंट तोड़ दो तो फिर इसे ढहने मैं ज्यादा वक़्त नहीं लगता........... दीवारें कई तरह की होती हैं..... पर वो दीवार सबसे खतरनाक होती है जो दिखाई नहीं देती.... जब हम किसी आदमी के पास बहुत जल्दी जाने की कोशिश करतें हैं तो उसके आसपास जो एक दीवार होती है जो जल्दी मैं हमने नहीं देखी.... उसी दीवार मैं जाकर सर टकराता है......... दीवारें बनाने मैं जितना वक़्त हम बर्बाद करते हैं उसका आधा भी अगर उन्हें तोड़ने में लगायें तो आसपास की सारी दीवारें ख़त्म हो जाएँगी... जब भी हम किसी के आसपास कोई दीवार देखते हैं तो बजाय उसे तोड़ने की कोशिश करने के हम अपने और उसके बीच में उस से भी ऊँची दीवार बना लेते हैं..... अरे यार दीवार बनाना ही है तो कम से कम उस में झरोखे तो छोड़ दो.... क्या कहते हो ............
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Loved reading this Arun .. and by the way wish you a belated happy birthday. May God bless you and family. and I just loved this profile pic of yours.:)
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