ना गलती है ये साहिल की
न कसूर कुछ है माझी का
कोई गुस्ताखी नहीं है मौजों की
बस खुदा ही मुझसे रूठ गया
दुनिया है, रौनकें हैं
उत्सव हैं मेले हैं
तुम क्या छूटे
कारवां ही मेरा छूट गया
तनहा हूँ
बैठा हूँ
जिंदा हूँ
बस जीना ही अब भूल गया
भूलें हैं, सबसे होती हैं
मैंने की, कुछ तुमने भी
प्यार का शीसा पकड़ कर चल रहे थे
हम गिरे तो टूट गया.

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